Munshi premchand ki jivani in hindi. Hindi Stories 2019-01-07

Munshi premchand ki jivani in hindi Rating: 9,5/10 834 reviews

Munshi Premchand: जीवन परिचय

munshi premchand ki jivani in hindi

दोनो ने एक दूसरे को भीत नेत्रों स देखा और सिर झुका लिया. यदि आपको इसमें कोई भी खामी लगे या आप अपना कोई सुझाव देना चाहें तो आप नीचे comment ज़रूर कीजिये. जब पेट भर गया, दोनों ने आजादी का अनुभव किया तो मस्त होकर उछलने-कूदने लगे. Another Munshi Prem Chand Can not born in future. सोंठ, गुड़, तेल, कुछ भी तो नही है घर में! उनके जीवन में वे हमेशा चुनौतियों और मुश्किलों का सामना करते थे.

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मुंशी प्रेमचंद की कहानी

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Now it is my fortune that it is available in this site. माधव आसमान कि तरफ देखकर बोला, मानो देवताओं को अपनी निश्पाप्ता का साक्षी बाना रह हो — दुनिया का दस्तूर है, नहीं लोग बाम्नों को हज़ारों रुपये क्यों दे देते हैं? हम दोनो हृदय से आशीर्वाद दे रहे हैं. सद् गुणों का इतना अनादर कहीं नहीं देखा. उसका चेहरा देखकर अन्तर्ज्ञान सं दोनो मित्रों के दिल काँप उठे. Ek baar fir se saadhuwad Dear Sir: How do I express my gratitude for such a treasure that you have made available on line in Hindi.

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कफ़न

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साल-भर जिसके साथ सुख-चैन से रहा, उसी के साथ इतनी बेवफाई! मारते तो दोनों सींग नीचे करके हुँकारते. घासीराम ईश्वर के परम भक्त थे। नींद खुलते ही ईशोपासन में लग जाते। मुँह-हाथ धोते आठ बजते, तब असली पूजा शुरू होती, जिसका पहला भाग भंग की तैयारी थी। उसके बाद आधा घण्टे तक चन्दन रगड़ते, फिर आईने के सामने एक तिनके से माथे पर तिलक लगाते। चन्दन की दो रेखाओं के बीच में लाल रोरी की बिन्दी होती थी। फिर छाती पर, बाहों पर चन्दन की गोल-गोल मुद्रिकाएं बनाते। फिर ठाकुरजी की मूर्ति निकालकर उसे नहलाते, चन्दन लगाते, फूल चढ़ाते, आरती करते, घंटी बजाते। दस बजते-बजते वह पूजन से उठते और भंग छानकर बाहर आते। तब तक दो-चार जजमान द्वार पर आ जाते! वहाँ ज़रा देर तक दोनों असमंजस में खडे रहे. हम दोनों उसके सिरहाने बैठे रहे। दवा दारु जो कुछ हो सका, सब कुछ किया, पर वोह हमें दगा दे गयी। अब कोई एक रोटी देने वाला भी न रह मालिक! घीसू ने इस भोले-भाले सवाल का कुछ उत्तर न दिया. कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर हैं, लेकिन कभी-कभी उसे भी क्रोध आ जाता हैं, किन्तु गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना. जरुर पढ़े: मुंशी प्रेमचंद के लेखन काम — Munshi Premchand Contribution In Literature :- प्रेमचंद ने अपने जीवन में तक़रीबन 300 लघु कथाये और 14 उपन्यास, बहोत से निबंध और पत्र भी लिखे है. इतना ही नही उन्होंने बहोत से बहु-भाषिक साहित्यों का हिंदी अनुवाद भी किया है.

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Munshi Premchand Thoughts in Hindi on Poems Best Sayings on Life Image

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रखवालो ने उसे भी पकड़ लिया. Thanks a lot to the provider. प्रेमचंद के साहित्य व भाषा संबंधित निबंध व भाषण 'कुछ विचार' नामक संग्रह में संकलित हैं। इसके अतिरिक्त 'साहित्य' का उद्देश्य में प्रेमचंद की अधिकांश सम्पादकीय टिप्पणियां संकलित हैं। यहाँ प्रेमचंद के भाषण, आलेख व निबंधों को संकलित किया जा रहा है। निसंदेह यह संकलन पाठकों को साहित्यकार प्रेमचंद को एक विचारक के रूप में भी समझने का अवसर प्रदान करेगा।. गया हड़बड़ाकर बाहर निकला और बैलों को पकड़ने चला. कर्ज़ से लदे हुए। गालियाँ भी खाते, मार भी खाते, मगर कोई गम नहीं। दीं इतने की वसूली की बिल्कुल आशा ना रहने पर भी लोग इन्हें कुछ न कुछ कर्ज़ दे देते थे। मटर, आलू कि फसल में दूसरों के खेतों से मटर या आलू उखाड़ लाते और भून-भूनकर खा लेते या दस-पांच ईखें उखाड़ लाते और रात को चूसते। घीसू ने इसी आकाश-वृति से साठ साल कि उम्र काट दी और माधव भी सपूत बेटे कि तरह बाप ही के पद चिन्हों पर चल रहा था, बल्कि उसका नाम और भी उजागर कर रहा था। इस वक़्त भी दोनो अलाव के सामने बैठकर आलू भून रहे थे, जो कि किसी खेत से खोद लाए थे। घीसू की स्त्री का तो बहुत दिन हुए देहांत हो गया था। माधव का ब्याह पिछले साल हुआ था। जबसे यह औरत आयी थी, उसने इस खानदान में व्यवस्था की नींव डाली थी और इन दोनो बे-गैरतों का दोजख भरती रहती थी। जब से वह आयी, यह दोनो और भी आराम तलब हो गए थे। बल्कि कुछ अकड़ने भी लगे थे। कोई कार्य करने को बुलाता, तो निर्बयाज भाव से दुगनी मजदूरी माँगते। वही औरत आज प्रसव-वेदना से मर रही थी, और यह दोनों शायद इसी इंतज़ार में थे कि वह मर जाये, तो आराम से सोयें। घीसू ने आलू छीलते हुए कहा- जाकर देख तो, क्या दशा है उसकी? लोगों को विश्वास नहीं आएगा, लेकिन फिर वही रुपये देंगे। माधव भी हंसा — इन अनपेक्षित सौभाग्य पर. इसीलिए प्रेमचंद ने बाद में सेंट्रल हिंदु कॉलेज में एडमिशन लेने की ठानी लेकिन गणित कमजोर होने की वजह से वहा भी उन्हें एडमिशन नही मिल सका.


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“उपन्यास सम्राट” मुंशी प्रेमचंद

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लेकिन क्वीन कॉलेज में केवल पहली श्रेणी के विद्यार्थियों को ही फीस कन्सेशन दिया जाता था. Mujhe lagta hai ki hindi ke utthan ke liye kam karna pratyek hindibhashi ka kartavya hai. बड़ी विपत्ति में हूँ। माधव कि घर-वाली गुज़र गयी। रात-भर तड़पती रही सरकार! प्रेमचंद के लघुकथा साहित्य की चर्चा करें तो प्रेमचंद ने लघु आकार की विभिन्न कथा-कहानियां रची हैं। इनमें से कुछ लघु-कथा के मानक पर खरी उतरती है व अन्य लघु-कहानियां कही जा सकती हैं। प्रेमचंद की लघु-कथाओं में - कश्मीरी सेब, राष्ट्र का सेवक, देवी, बंद दरवाज़ा, व बाबाजी का भोग प्रसिद्ध हैं। यह पृष्ठ प्रेमचंद की लघु-कथाओं को समर्पित है।. तू मुझेईसा गधा समझता है? बाबू चैतन्यदास ने अर्थशास्त्र खूब पढ़ा था, और केवल पढ़ा ही नहीं था, उसका यथायोग्य व्यवहार भी वे करते थे। वे वकील थे, दो-तीन गांवों में उनकी जमींदारी भी थी, बैंक में भी कुछ रुपये थे। यह सब उसी अर्थशास्त्र के ज्ञान का फल था। जब कोई खर्च सामने आता तब उनके मन में स्वभावतः: प्रश्न होता था - इससे स्वयं मेरा उपकार होगा या किसी अन्य पुरुष का? Great work sir… You have really made reading premchand enjoyfull. उस पर सो रहा है। उठा ले कुल्हाड़ी और लकड़ी फाड़ डाल। तुझसे जरा-सी लकड़ी नहीं फटती। फिर साइत भी वैसी ही निकलेगी, मुझे दोष मत देना! Tears flowed freely and voice choked. उनके दादा गुर सहाई राय पटवारी थे और उनके पिता अजीब राय पोस्ट ऑफिस कर्मचारी थे.

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आधी बोतल से ज़्यादा उड़ गयी। घीसू ने दो सेर पूड़ियाँ मंगायी. सिर्फ थोड़े से पैसे बच रहे. माधव ने फिर आसमान की तरफ देखकर कहा — वह बैकुंठ में जायेगी दादा, बैकुंठ की रानी बनेगी। घीसू खड़ा हो गया और उल्लास की लहरों में तैरता हुआ बोला — हाँ बीटा, बैकुंठ में जायेगी। किसी को सताया नहीं, किसी को दबाया नहीं। मरते-मरते हमारी जिन्दगी की सबसे बड़ी लालसा पूरी कर गयी। वह न बैकुंठ जायेगी तो क्या मोटे-मोटे लोग जायेंगे, जो गरीबों को दोनों हाथों से लूटते हैं, और अपने पाप को धोने के लिए गंगा में नहाते हैं और मंदिरों में जल चडाते हैं? सामने मटर का खेत था ही. प्रेमचंद का जन्म ३१ जुलाई १८८० को के निकट लमही गाँव में हुआ था। उनकी माता का नाम आनन्दी देवी था तथा पिता मुंशी अजायबराय लमही में डाकमुंशी थे। उनकी शिक्षा का आरंभ उर्दू, फारसी से हुआ और जीवन यापन का अध्यापन से। में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे एक स्थानीय विद्यालय में शिक्षक नियुक्त हो गए। नौकरी के साथ ही उन्होंने पढ़ाई जारी रखी में इंटर पास किया और में बी. अगर इतनी मेहनत से काम न चलता था और काम ले लेते.

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मुंशी प्रेमचंद की कहानी

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बेचारे शराब नहीं पीते, चार पैसे कुसमय के लिए बचाकर रखते हैं, जी तोड़कर काम करते हैं, किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, चार बातें सुनकर गम खा जाते हैं फिर भी बदनाम हैं. जिनसे उनका विवाह होने जा रहा था वह लड़की अमीर घराने की थी और प्रेमचंद से बड़ी थी, प्रेमचंद की तुलना में कुछ खास नही दिखती थी. यहाँ भी किसी सज्जन का वास हैं. दोनों एक दूसरे को चाटकर और सूँघकर अपना प्रेम प्रकट करते, कभी-कभी सींग भी मिला लिया करते थे -- विग्रह के नाते से नहीं, केवल विनोद के भाव से, आत्मीयता के भाव से, जैसे दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता हैं. कई तो इतने कमजार हो गये थे कि खड़े भी न हो सकते थे.

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धर के लोग भोजन करने लगे. उस समय प्रेमचंद ने काफी कुछ पढ़ा था और काफी किताबे भी वे पढ़ते थे. मोती ने देखा -- खेल में झगड़ा हुआ चाहता हैं तो किनारे हट गया उसे अवसर न देते थे. पूरी बोतल बीच में है। भरपेट खाकर माधव ने बची हुई पूडियों का पत्तल उठाकर एक भिखारी को दे दिया, जो खडा इनकी और भूखी आंखों से देख रह था। और देने के गौरव, आनंद, और उल्लास का अपने जीवन में पहली बार अनुभव किया। घीसू ने कहा — ले जा, ख़ूब खा और आर्शीवाद दे। बीवी कि कमायी है, वह तो मर गयी। मगर तेरा आर्शीवाद उसे ज़रूर पहुंचेगा। रोएँ-रोएँ से आर्शीवाद दो, बड़ी गाडी कमायी के पैसे हैं! यहाँ कई भैसे थी, बकरियाँ, कई घोड़े, कई गधे; पर किसी से सामने चारा न था, सब जमीन पर मुरदो की करह पड़े थे. उनके पिता के जमनिया में स्थानांतरण होने के बाद 1890 के मध्य में प्रेमचंद ने बनारस के क्वीन कॉलेज में एडमिशन लिया.

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. वह मारते मारते थक गया, पर दोनों ने पाँव न उठाया. पास करने के बाद स्कूलों के डिप्टी सब-इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हुए। सात वर्ष की अवस्था में उनकी माता तथा चौदह वर्ष की अवस्था में पिता का देहान्त हो जाने के कारण उनका प्रारंभिक जीवन संघर्षमय रहा। उनका पहला विवाह उन दिनों की परंपरा के अनुसार पंद्रह साल की उम्र में हुआ जो सफल नहीं रहा। वे से प्रभावित रहे, जो उस समय का बहुत बड़ा धार्मिक और सामाजिक आंदोलन था। उन्होंने विधवा-विवाह का समर्थन किया और में दूसरा विवाह अपनी प्रगतिशील परंपरा के अनुरूप बाल-विधवा शिवरानी देवी से किया। उनकी तीन संताने हुईं- श्रीपत राय, अमृतराय और कमला देवी श्रीवास्तव। में उनकी रचना राष्ट्र का विलाप के लिए हमीरपुर के जिला कलेक्टर ने तलब किया और उन पर जनता को भड़काने का आरोप लगाया। सोजे-वतन की सभी प्रतियां जब्त कर नष्ट कर दी गई। कलेक्टर ने नवाबराय को हिदायत दी कि अब वे कुछ भी नहीं लिखेंगे, यदि लिखा तो जेल भेज दिया जाएगा। इस समय तक प्रेमचंद ,धनपत राय नाम से लिखते थे। उर्दू में प्रकाशित होने वाली ज़माना पत्रिका के सम्पादक ने उन्हें प्रेमचंद नाम से लिखने की सलाह दी। इसके बाद वे प्रेमचन्द के नाम से लिखने लगे। जीवन के अंतिम दिनों में वे गंभीर रुप से बीमार पड़े। उनका उपन्यास मंगलसूत्र पूरा नहीं हो सका और लंबी बीमारी के बाद को उनका निधन हो गया।. लेकिन इसके बावजूद उन्होंने उस समय दूसरी श्रेणी में मेट्रिक की परीक्षा पास कर ही ली. श्रद्धालुता का यह रंग तुरंत ही बदल गया। अस्थिरता नशे की खासियत है। दु:ख और निराशा का दौरा हुआ। माधव बोला — मगर दादा, बेचारी ने जिन्दगी में बड़ा दु:ख भोगा। कितना दु:ख झेलकर मरी! उनके पूर्वज विशाल कायस्थ परिवार से संबंध रखते थे, जिनके पास अपनी खुद की छह बीघा जमीन भी थी. घर में मिट्टी के दो-चार बर्तन के सिवा और कोई सम्पत्ति नहीं थी। फटे चीथड़ों से अपनी नग्नता को ढांके हुए जीये जाते थे। संसार की चिंताओं से मुक्त! हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी. लकड़ी तो अभी ज्यों की त्यों पड़ी हुई है। इतनी देर तू करता क्या रहा? जीवन में न तो उनको कभी सुख-चैन का विलास मिला और न ही उनकी इसकी तमन्ना थी.

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खड़ा हुआ ना जाता था। झटपट अपने कम्बल पर जाकर लेट गया। ऐसा दिल दरियाव था वह ठाकुर! मरी तो ख़ूब खिला पिला कर! गाँव के बाहर निकल जाने पर वह रुका ; पर खड़ा दढियल का रास्ता देख रहा था. Ab videsh mein baitha hua hoon, jahan kaam bahut adhik nahi hai aur samay milta hai kuchh aur karne kaa. Each and every reader must be grateful to you. हमारे पास फूंकने को क्या है! Your initivate is highly accoladed. किताबो में रूचि होने की वजह से वही किताबो के थोक व्यापारी के पास किताबे बेचने का उन्हें काम मिल गया, बेचते समय उन्हें बहोत सी किताबो को पढने का मौका भी मिल जाता.

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